संजीवनी क्लीनिक योजना की रफ्तार धीमी, दो केंद्र अब भी अधूरे
संवाददाता: मोहसिन अहमद | लोकेशन: विदिशा | स्लग: संजीवनी
एंकर:
विदिशा शहर में आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक योजना की रफ्तार सुस्त पड़ती नजर आ रही है। नगर पालिका द्वारा बनाए जा रहे छह क्लीनिकों में से फिलहाल केवल चार ही संचालित हो रहे हैं, जबकि दो क्लीनिक—महलघाट और जतरापुरा—अब तक अधूरे हैं।
महलघाट रोड पर क्लीनिक भवन का निर्माण करीब दो साल पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया जा सका। वहीं जतरापुरा रोड पर पिछले एक साल से निर्माण कार्य जारी है, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है—यहां तक कि भवन की छत भी नहीं बन सकी है।
शहर में कुल छह संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत किए गए थे। इनमें से पुराना अस्पताल, किलाअंदर, बेसनगर और टीलाखेड़ी में पहले से मौजूद भवनों को मरम्मत और रंगरोगन कर क्लीनिक में बदला गया, जिससे इन चारों केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो सकीं।
लेकिन जिन स्थानों पर भवन निर्माण की जिम्मेदारी नगर पालिका के पास थी, वहां कार्य की गति बेहद धीमी रही। इस लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी सरकारी अस्पताल का रुख करना पड़ता है।
महलघाट क्लीनिक के निर्माण में तकनीकी खामियां भी सामने आई हैं। भवन नीचाई में बनाया गया है, जबकि आसपास की सड़कें और मकान ऊंचाई पर हैं। ऐसे में बारिश के दौरान यहां पानी भरने का खतरा बना रहेगा। साथ ही, क्लीनिक परिसर में बाउंड्री वॉल भी नहीं बनाई गई है।
नगर पालिका के सहायक यंत्री आरके वर्मा ने बताया कि महलघाट क्लीनिक को जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके लिए भवन में एक फीट तक फिलिंग कर ऊंचाई बढ़ाई जाएगी।
वहीं जतरापुरा क्लीनिक का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा अधूरा छोड़ दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं ने भी संजीवनी योजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।











