25 मिनट के ऑपरेशन में 21 आतंकी ठिकाने नष्ट:
बेबी चक्रवर्ती: दिल्ली:- भारतीय खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में 21 सक्रिय आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों के बारे में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। ये अड्डे पुलवामा हमले से लेकर मुंबई 26/11 तक कई विध्वंसकारी हमलों के लिए आधार रहे हैं।
हालिया खुफिया जानकारी के आधार पर, पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में फैले कुल 21 सक्रिय आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों के नाम और गतिविधियों का खुलासा किया गया है। अनेक गुप्त दस्तावेजों के आधार पर मात्र 25 मिनट में तैयार की गई यह रिपोर्ट आतंकवाद की भयावह तस्वीर प्रस्तुत करती है। जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) द्वारा नियंत्रित ये केंद्र सीधे तौर पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं।
कुछ महत्वपूर्ण आधार:
मरकज़ सुभान अल्लाह, बहावलपुर (JeM मुख्यालय):
जैश-ए-मोहम्मद का मुख्य मुख्यालय, जहां मसूद अजहर सहित शीर्ष नेता स्थित हैं। यहीं पर पुलवामा हमले की योजना बनाई गई थी।
मरकज़ तैय्यबा, शिष्यों को (लश्कर मुख्यालय):
26/11 के मुंबई हमलों की योजना यहीं बनाई गई थी। ओसामा बिन लादेन ने भी दान दिया था। अजमल कसाब ने यहीं प्रशिक्षण लिया था।
सरजाल, नरोवाल:
सीमा से सिर्फ 6 किमी दूर स्थित जैश-ए-मोहम्मद का अड्डा वह जगह है जहां घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में हथियारों की तस्करी के लिए सुरंगें खोदी जाती हैं।
महमुना ज़ोआ, सियालकोट (एचएम बेस):
जम्मू क्षेत्र हिज्बुल मुजाहिदीन आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ और हमले की योजना बनाने का केन्द्र है।
शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद
पाकिस्तानी सेना के प्रशिक्षकों की निगरानी में एक साथ 250 आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया गया।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:
अधिकांश अड्डे मस्जिदों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों या धार्मिक शिक्षा केंद्रों की आड़ में संचालित किए जा रहे हैं।
हर साल, हजारों युवाओं को इन केंद्रों पर धार्मिक उग्रवाद, हथियार चलाने और गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है। अधिकांश केंद्रों में पाकिस्तानी सेना, विशेषकर एसएसजी कमांडो के माध्यम से सक्रिय सहयोग करती है।
ये प्रशिक्षण अड्डे पाकिस्तान के “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” के सबूत हैं। यहां से न केवल सीमावर्ती राज्यों बल्कि भारत के शहरी क्षेत्रों में भी हमलों की योजना बनाई जाती है।
यदि भारत सरकार यह जानकारी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने उजागर कर दे तो पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तैयारी को और बढ़ाना भी जरूरी है।












