Kolkata: विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस का आयोजन

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस का आयोजन

हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है ताकि ऑटिज़्म के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े। इस वर्ष यह दिन हुगली जिले के उत्तरपाड़ा में मनाया गया, जहाँ अभिभावकों के लिए एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित वक्ता, अभिभावक और विशेषज्ञ उपस्थित थे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था ऑटिज़्म को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना और इससे जुड़ी सामाजिक कुरीतियों को दूर करना।

प्रख्यात स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद सहिदुल अरेफिन ने कहा, “ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया है। लेकिन समय पर सहायता न मिलने पर यही अलगपन एक रुकावट बन जाता है।”

उन्होंने कहा, “हर दिन अभिभावक हमारे पास डर और आँसू के साथ आते हैं। समाज की तानों और टिप्पणियों से वे टूट जाते हैं। ‘आपका बेटा कुछ नहीं सीख पाएगा’, ‘बेटी को कुछ समझ में नहीं आता’—ऐसी बातें उन्हें सुननी पड़ती हैं। लेकिन आधुनिक शोध में इसके लिए बेहतर इलाज उपलब्ध है। इसके लिए लोगों को अंधविश्वास से बाहर आकर डॉक्टरों और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।”

डॉ. अरेफिन ने बताया कि अगर जन्म के बाद 3 से 5 साल की उम्र के बीच ऑटिज़्म की पहचान हो जाए और स्पीच थेरेपी शुरू की जाए, तो बच्चों की संप्रेषण, सीखने और सामाजिक कौशल में बहुत सुधार आता है। “नियमित थेरेपी से कई मूक बच्चे कुछ ही महीनों में अर्थपूर्ण ढंग से बोलना शुरू कर देते हैं,” उन्होंने कहा। “क्योंकि बचपन में बच्चे का मस्तिष्क सबसे अधिक ग्रहणशील होता है। यदि हम प्रतीक्षा करते हैं, तो यह संभावना खत्म हो जाती है।”

आयोजक तरुण दासगुप्ता ने समावेशी विद्यालय वातावरण, बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना, और ग्रामीण तथा निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए स्थानीय थेरेपी सेवाओं की उपलब्धता को भी अत्यंत आवश्यक बताया।

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Author: Bharatnewstv_1

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