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अवैध रेत उत्खनन को पंगा लेगी सीजेएम की टीम निरीक्षण कर आएगी रिपोर्ट

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रेत के अवैध खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान की जमीनी हकीकत जांचने के लिए जल्द ही 4 सदस्य टीम भिंड जिले की खदानों का मौका मुआयना करेगी। उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के आदेश पर सीजीएम की अध्यक्षता में गठित है टीम निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर चार नंबर तक हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी।उल्लेखनीय है कि भिंड जिले में पावर मेक कंपनी द्वारा शासन द्वारा जारी टेंडर लेकर यहां रेत का उत्खनन किया जा रहा है। जिसको लेकर कंपनी पर लंबे अर्से से यहां रेत का अवैध उत्खनन करते हुए नदियों व पर्यावरण को हानि पहुंचाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। इनको लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में देवेश शर्मा द्वारा तथ्यात्मक सबूतों के साथ एक जनहित याचिका दायर करते हुए इस पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव की युगल पीठ द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भिंड की अध्यक्षता में 4 सदस्य टीम गठित करते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच करने के आदेश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम जल्दी ही जिले की खदानों का मौका मुआयना कर यहां हो रहे रेत उत्खनन का सत्यापन करते हुए विस्तार में इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट को सौंपीगी। ज्ञात हो कि सीजीएम के अलावा इस जांच टीम में पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित एसडीओ रेवेन्यू (राजस्व) एवं जिला खनिज अधिकारी शामिल रहेंगे, जो अपने अपने विभागीय जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर निरीक्षण करते हुए रिपोर्ट तैयार करेंगे।
17 दिन में तैयार होगी जांच रिपोर्ट*
हाईकोर्ट ग्वालियर की डबल बैच के आदेश पर बनाई इस जांच दल को अगले 17 दिनों में जिले की खदानों का निरीक्षण करते हुए राजस्व दस्तावेज एवं नदी से रेत उत्खनन क्षेत्र की दूरी के साथ इससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान का आंकलन किया जाएगा।इसके साथ ही टीम के सदस्यों द्वारा माइनिंग एक्ट और प्रदेश शासन द्वारा खनिज कंपनी को दिए गए उत्खनन रकबे का भी निरीक्षण किया जाएगा। इसी के आधार पर सीजेएम की अध्यक्षता में एक टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर 4 नवंबर 2020 तक उच्च न्यायालय में शॉपनी होगी। जिस पर अगली सुनवाई में हाईकोर्ट को बैच द्वारा निरीक्षण कर जरूरी तथ्य देकर जाएंगे।

-रेत के अवैध खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान की जमीनी हकीकत जांचने के लिए जल्द ही 4 सदस्य टीम भिंड जिले की खदानों का मौका मुआयना करेगी। उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के आदेश पर सीजीएम की अध्यक्षता में गठित है टीम निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर चार नंबर तक हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी।उल्लेखनीय है कि भिंड जिले में पावर मेक कंपनी द्वारा शासन द्वारा जारी टेंडर लेकर यहां रेत का उत्खनन किया जा रहा है। जिसको लेकर कंपनी पर लंबे अर्से से यहां रेत का अवैध उत्खनन करते हुए नदियों व पर्यावरण को हानि पहुंचाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। इनको लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में देवेश शर्मा द्वारा तथ्यात्मक सबूतों के साथ एक जनहित याचिका दायर करते हुए इस पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव की युगल पीठ द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भिंड की अध्यक्षता में 4 सदस्य टीम गठित करते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच करने के आदेश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम जल्दी ही जिले की खदानों का मौका मुआयना कर यहां हो रहे रेत उत्खनन का सत्यापन करते हुए विस्तार में इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट को सौंपीगी। ज्ञात हो कि सीजीएम के अलावा इस जांच टीम में पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित एसडीओ रेवेन्यू (राजस्व) एवं जिला खनिज अधिकारी शामिल रहेंगे, जो अपने अपने विभागीय जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर निरीक्षण करते हुए रिपोर्ट तैयार करेंगे।
*17 दिन में तैयार होगी जांच रिपोर्ट*
हाईकोर्ट ग्वालियर की डबल बैच के आदेश पर बनाई इस जांच दल को अगले 17 दिनों में जिले की खदानों का निरीक्षण करते हुए राजस्व दस्तावेज एवं नदी से रेत उत्खनन क्षेत्र की दूरी के साथ इससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान का आंकलन किया जाएगा।इसके साथ ही टीम के सदस्यों द्वारा माइनिंग एक्ट और प्रदेश शासन द्वारा खनिज कंपनी को दिए गए उत्खनन रकबे का भी निरीक्षण किया जाएगा। इसी के आधार पर सीजेएम की अध्यक्षता में एक टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर 4 नवंबर 2020 तक उच्च न्यायालय में शॉपनी होगी। जिस पर अगली सुनवाई में हाईकोर्ट को बैच द्वारा निरीक्षण कर जरूरी तथ्य देकर जाएंगे।
*अवैध परिवहन व रॉयल्टी में घपले के आरोप*
जानकारी हो कि पावर मेक कंपनी द्वारा जिले में किए जा रहे रेत उत्खनन को अवैध ठहराया जाता रहा है जिसमें कंपनी के कर्मचारियों पर रेत माफिया पर सांठगांठ कर नदियों को खोखला कर रेत निकालने सहित उनके अवैध रूप से परिवहन और शासन द्वारा जारी रॉयल्टी में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। इसके साथ ही कंपनी द्वारा बनाए गए डंप क्षेत्र गौरई, नुन्हाटा, सगरा, कमलपुरा मैं निरीक्षण के द्वारा यहां रेत डंप नहीं पाया गया। जबकि इस दौरान कंपनी द्वारा लगातार रेत का परिवहन किया जाता रहा। इसी को लेकर पूर्व में शिकायतकर्ता द्वारा पावर में कंपनी पर रॉयल्टी कटाने में भ्रष्टाचार करने के सबूत भी दिए गए थे। लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा इस दिशा में ठोस कदम ना उठाए जाने पे उनके प्रशासनिक तत्वों पर प्रश्न चिन्ह लगाया है।।
चंबल संभाग चीफ निश्चल चौधरी