पालपुर (जिला श्योपुर) में घड़ियाल एवं कछुओं का पुनर्वन्यीकरण
श्योपुर, मध्य प्रदेश, 1 मार्च 2026 — वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मोहन्कुमार यादव ने आज कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नदी पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिए घड़ियाल और कछुओं का पुनर्वन्यीकरण कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 53 युवा घड़ियाल शावकों (28 नर और 25 मादा) को कूनो नदी के पास पालपुर किले के समीप छोड़ा, जिनका पालन-पोषण डिओरी घड़ियाल केंद्र में किया गया था। इन शावकों का प्राकृतिक आवास में पुनर्वास करना नदी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इसी के साथ 25 तीन-पट्टीदार छत वाले कछुए (three-striped roofed turtles), जो कि देश में संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक हैं, को भी नदी में छोड़ा गया। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य इन जलीय प्रजातियों की संख्या बढ़ाना तथा उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में स्वस्थ रूप से पुनर्स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह पहल “स्थायी संरक्षण, समुदाय की भागीदारी और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के लिए समर्पण का प्रतीक” है। उन्होंने बताया कि ये प्राचीन जीव दीनोसॉर काल से अस्तित्व में हैं और नदी पारिस्थितिकी तंत्र में स्वच्छता व जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस कार्यक्रम को नेशनल चंबल सैंक्चुअरी के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ चीता पुनर्स्थापन परियोजना भी चल रही है। श्योपुर-कूनो क्षेत्र में हाल ही में बोत्सवाना से आए नौ और चीते को भी नेशनल पार्क में पहुंचाया गया है, जिससे वहाँ बड़ा संरक्षण नेटवर्क विकसित हो रहा है।
विशेषज्ञों ने इस पुनर्वास कदम को पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने, जैव विविधता को मजबूत करने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से सकारात्मक बताया है, जिससे स्थानीय समुदायों को भी रोजगार और अवसर मिल सकते हैं।









