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मध्यप्रदेश में भाजपा की हार का बदला किसानों से ले रही है मोदी सरकार

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मोदी सरकार ने म.प्र. का 2 लाख 5 हजार मेट्रिक टन यूरिया रोका

भोपाल, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा, उपाध्यक्षद्वय भूपेन्द्र गुप्ता और अभय दुबे, मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने आज यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा है कि भाजपा की हार का बदला मोदी सरकार ने म.प्र. के किसानों से लेना प्रारंभ कर दिया है। उनकी मान्यता है कि भाजपा की हार के लिये किसान जिम्मेदार है। हार के बाद से ही भाजपा किसानों से प्रतिशोध की आग में जल रही है। रबी सीजन 2018-19 में दिसम्बर माह में यूरिया की मांग/ आवंटन 3 लाख 70 हजार मेट्रिक टन है। जिसके एवज में केन्द्र की मोदी सरकार ने अब तक मात्र 1 लाख 65 हजार मेट्रिक टन यूरिया भेजा है अर्थात केंद्र की मोदी सरकार ने दिसम्बर माह का 2 लाख 5 हजार मेट्रिक टन यूरिया जानबूझकर रोक दिया है और जो उवर्रक की रेक आनी है वह मात्र 0.22 लाख मेट्रिक टन है।

यूरिया ही नहीं डी.ए.पी. भी 0.76 लाख टन आवंटन की तुलना में 0.53 लाख टन भेजा है। काम्पलेक्स उर्वरक भी 0.50 लाख टन आवंटन की तुलना में मात्र 0.05 लाख टन भेजा है और एम.ओ.पी. भी 0.18 लाख टन के आवंटन की तुलना में मात्र 0.02 लाख टन ही भेजा है। जबकि म.प्र. में भाजपा की सरकार के रहते मोदी सरकार ने यूरिया का आवंटन नवम्बर माह में 3 लाख 77 हजार मेट्रिक टन किया था और उसकी तुलना में अधिक सप्लाय करते हुए 4 लाख 31 हजार टन यूरिया भेजा। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि म.प्र. भाजपा के शीर्षस्थ नेता दिल्ली में मोदी सरकार के साथ षडयंत्र में शामिल होकर अपनी हार का बदला किसानों से ले रहे हैं।

कांग्रेस की जीत से उत्साहित किसानों ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष रबी सीजन दिसम्बर माह में गेहूॅं की बुआई 45 लाख 95 हजार हेक्टेयर में की है। जबकि पिछले वर्ष 17 दिसम्बर 2017 में यह 39 लाख 21 हजार हेक्टेयर था। इसी प्रकार कुल अनाज लगभग 7 लाख हेक्टेयर अधिक बोया गया है। चना, मसूर, दलहन, तिलहन, गन्ना इत्यादि मिलाकर 17 दिसम्बर 2012 की स्थिति में रबी की बुआई 97.07 लाख हेक्टेयर की गई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 लाख हेक्टेयर अधिक है।

म.प्र. भारतीय जनता पार्टी लगातार अपनी हार के बाद यह चुनौती दे रही थी कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ किसानों की कर्ज माफी नहीं कर पायेंगे। यहां तक की पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया ने तो यह तक कह दिया कि हमने म.प्र. का खजाना पूरी तरह खाली कर दिया है कमलनाथजी किसी हाल में किसानों की कर्ज माफी नहीं कर सकते।

कमलनाथ जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही वादे के मुताबिक 10 दिनों की प्रतीक्षा नहीं करते हुए मात्र 10 मिनिट में किसानों की कर्ज माफी के आदेश जारी कर दिये। म.प्र. में 34 लाख किसानों का लगभग 38 हजार करोड़ रूपये का कर्ज माफ किया गया है। जिसमें से 13595 करोड़ का एन.पी.ए. भी शामिल है और लगभग 24500 करोड़ का किसानों का वर्तमान ऋण है जिसे माफ करने के आदेश जारी कर दिये गये हैं। जिसमें सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक एवं रीजनल रूरल बैंक भी शामिल है। किसानों के हित के उक्त बड़े फैसले से म.प्र. भाजपा बोखला गयी है और वह हर संभव कोशिश कर रही है कि किसानों की तरक्की में बाधा पैदा करे। चाहे वह किसानों की कर्ज माफी पर भ्रामक बयान हो या रबी सीजन 2018-19 में मोदी सरकार के माध्यम से किसानों के उर्वरक की सप्लाय को रोक दिया जाना हो।

म.प्र. कांग्रेस कमेटी भाजपा के इस किसान विरोधी रवैये का पूरजोर विरोध करती है और भाजपा को चेतावनी देती है कि अगर तुरंत उर्वरक की समस्या का निराकरण नहीं किया तो केन्द्र की भाजपा सरकार के खिलाफ और किसानों के समर्थन में कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी। ज्ञातव्य है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथजी ने किसानों के लिये भाजपा द्वारा कृत्रिम रूप से पैदा की गयी उर्वरक की समस्या के संदर्भ में आज दिल्ली में उर्वरक मंत्री श्री सदानंद गौड़ा से चर्चा की साथ ही उर्वरक की तुरंत आपूर्ति के संबंध में रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल से भी बात की है।