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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में घायल के कटे पैर का तकिया बनाने के मामले में कॉलेज प्रशासन ने सीनियर कंसलटेंट (परमर्शदाता) की लापरवाही मानते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है

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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में घायल के कटे पैर का तकिया बनाने के मामले में कॉलेज प्रशासन ने सीनियर कंसलटेंट (परमर्शदाता) की लापरवाही मानते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसके अलावा पांच सदस्यीय टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। कॉलेज प्रशासन ने ट्रामा सेंटर में लगे 5 कैमरों को भी तत्काल प्रभाव से चालू करा दिया है। इलाज में लापरवाही बरतने का मामला मुख्यमंत्री के पास भी भेजे जाने की तैयारी है।
डॉक्टरों ने मरीज की कटी टांग का तकिया बना सिर के नीचे लगाया, 4 सस्पेंड
बस हादसे में घायल क्लीनर घनश्याम के ऑपरेशन के समय कटे पैर को उसी का तकिया बनाने के मामले में कॉलेज प्रशासन ने ऑन कॉल कंसलटेंट डॉ प्रवीण सरावगी को प्रथम दृष्टया लापरवाह माना है। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. साधना कौशिक ने बताया कि मामले में उन्होंने डॉ. सरावगी के खिलाफ अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसके अलावा डॉ. नरेन्द्र सेंगर के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय टीम ने भी रविवार को प्रकरण से जुडे़ स्टाफ और डाक्टरों से उनके बयान लिए। इस दौरान कुछ स्टाफ से लिखित स्पष्टीकरण भी लिया गया है। टीम के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच रिपोर्ट सोमवार की देर शाम तक कॉलेज प्रशासन को सौंप दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के पास पहुंचेगा मामला
इलाज में लापरवारी बरतने का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचेगा। यह बीड़ा घायल घनश्याम के परिजनों के साथ इटायल ग्राम प्रधान ने उठाया है। ग्राम प्रधान की मानें तो वह मामले की सीधे तौर पर सीएम से शिकायत करेंगें। इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर समय पर इलाज न देने और मरीज के घंटों तड़पते रहने का भी आरोप लगाया है।
विश्वविद्यालय के समीप स्थित एक निजी अस्पताल में घायल घनश्याम का इलाज कराने के दौरान उपस्थित इटायल ग्राम प्रधान किशोरी लाल ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, घायल घनश्याम को इलाज नहीं मिला। घनश्याम को सुबह करीब 9 बजे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। वह काफी देर तक तड़पता रहा। घनश्याम के चाचा छविलाल सहित अन्य परिजनों का आरोप है कि जब घनश्याम बेहोश हो गए तब इलाज शुरू हो सका।
लापरवाही बरतने का दूसरा मामला
ग्राम प्रधान के अनुसार उनके सामने लापरवाही बरतने का यह दूसरा मामला है। दो साल पहले बरूआसागर में ट्रक व बाइक की भिड़ंत में ग्राम इटायल में ही रहने वाला किसान बुरी तरह से जख्मी हो गया था। उसे भी इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तब उसका दांया पैर इलाज के दौरान काट दिया गया था। उसे भी काफी देर तक तड़पना पड़ा था।
आखिर कटा पैर कैसे बना तकिया?
घनश्याम का कटा पैर आखिर उसके ही सिर का तकि या कैसे बना? इस सवाल का जवाब न ही तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास है और न ही तो घनश्याम के परिजनों के पास है। जवाब खोजनें के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जांच टीम अपनी पड़ताल में जुटी है। जबकि डीएम द्वारा गठित दो सदस्यीय टीम सोमवार से जांच शुरू करेगी।
टीम कर रही दो बिन्दुओं पर जांच
जांच कर रही टीम के सदस्यों की मानें तो वह दो बिन्दुओं पर जांच कर रहे है। जिसमें से पहला बिन्दु तो यह है कि आखिर इलाज कराने आया मरीज निजी अस्पताल में क्यो गया? दूसरा उसका पैर तकि या कैसे बना? इसके लिए संबंधित स्टाफ से बयान लिए जा रहे हैं। जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

रिपोर्टर:- धीरज श्रीवास्तव