अभिषेक ने संशोधन विधेयक पर केंद्र की आलोचना की
बेबी चक्रवर्ती: कोलकाता:- केंद्र सरकार जनप्रतिनिधियों को गिरफ़्तार होने पर पद से हटाने के लिए एक नया विधेयक ला रही है। इसीलिए तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी केंद्र पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। अभिषेक ने केंद्र पर निशाना साधने के लिए पीओके का मुद्दा भी उठाया! वे सिर्फ़ खोखले भाषण देते हैं, लेकिन जब भारत की संप्रभुता की रक्षा, हमारी सीमाओं की रक्षा और हमारे दुश्मनों के ख़िलाफ़ मज़बूती से काम करने की बात आती है, तो वे कोई ठोस पहल नहीं करते।
उन्होंने यह भी लिखा, “यह सरकार जनविरोधी, किसान विरोधी, ग़रीब विरोधी, अनुसूचित जाति विरोधी, आदिवासी विरोधी, ओबीसी विरोधी, संघीय व्यवस्था विरोधी और सबसे बढ़कर भारत विरोधी साबित हुई है। यह देश के संविधान को बेच रही है। यह देश को अपनी निजी संपत्ति समझती है।”
अभिषेक के शब्दों में, “केंद्र राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है। केंद्र राज्य सरकार को गिराने की हर संभव कोशिश कर रहा है।” अभिषेक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
गौरतलब है कि आज यानी बुधवार को केंद्र सरकार लोकसभा में एक नया विधेयक ला रही है। केंद्र उन लोगों को हटाने के लिए विधेयक ला रहा है जो आरोपी हैं और पुलिस हिरासत में चले गए हैं। अमित शाह लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश करेंगे। नए संशोधन विधेयक के दायरे में प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी आएंगे। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश में किसी सरकार के मामले में अगर मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार होता है तो यह कानून तभी लागू होगा जब वह लगातार 30 दिनों तक पुलिस हिरासत में रहे। प्रधानमंत्री संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं, वह इस बारे में राष्ट्रपति को सूचित करेंगे। वहीं राज्य के मामले में राज्यपाल यह कार्रवाई करेंगे। पांच साल से ज्यादा की सजा मिलने पर उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है।










